ई-वे बिल की क्षमता करनी होगी दोगुनी

  • Posted on: 10 April 2018
  • By: admin
जीएसटी के तहत माल ढुलाई से जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली ई-वे बिल रविवार एक अप्रैल से शुरू हो गई। हालांकि कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों ने पहले ही दिन ई-वे बिल की क्षमता दोगुना बढ़ाने की मांग रखी दी है। उनका कहना है कि रोजाना 75 लाख ई-वे बिल निकालने की क्षमता पर्याप्त नहीं है और 15 अप्रैल से राज्यों के भीतर ई-वे बिल शुरू होने से प्रणाली ध्वस्त हो सकती है। यहां यह उल्लेखनीय है कि ई-वे बिल के पहले दिन शाम पांच बजे तक 1.71 लाख बिल सृजित किए गए।
वित्त मंत्रालय ने रविवार को कहा कि अब तक 10 लाख 96 हजार 905 करदाता और 10 हजार 796 ट्रांसपोर्टरों ने ई-वे बिल पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। सरकार ने दावा किया है कि पहले दिन प्रणाली में किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई। कर विशेषज्ञों और जीएसटी सुविधा प्रदाताओं का कहना है कि सरकार ने इस बार ई-वे बिल के बुनियादी ढांचे को तो मजबूत बनाया है, लेकिन किसी ई-वे बिल नंबर को कई बार सर्च नहीं किया जा सकेगा क्योंकि इससे लोड बढ़ेगा। साथ ही 30 दिनों का ई-वे बिल डाटा आकडिव में चला जाएगा। ट्रांसपोर्टर अभी भी ई-वे बिल सिस्टम में अपनी भूमिका को लेकर निश्चिंत नहीं है। उनके पास ई-वे बिल को लेकर कोई विशेषज्ञता भी नहीं है। ट्रांसपोर्टरों के एसोसिएशनों का कहना है कि रोजाना ई-वे बिल सृजित करने की क्षमता को 75 लाख से काफी अधिक करने की जरूरत है क्योंकि रोजाना 70 लाख ट्रक ही माल लेकर अपनी मंजिल की ओर निकलते हैं। साथ ही एक ट्रक में कई लोगों का सामान हो सकता है, जिससे ई-वे बिल की मांग अनुमान से कहीं अधिक होगी। ट्रांसपोर्टरों के संगठन का यह भी कहना है कि राज्यों के बीच माल परिवहन में ई-वे बिल तो एक अप्रैल से शुरू हो गया। लेकिन 15 अप्रैल से राज्यों के अंदर भी यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों में यह प्रणाली 15 अप्रैल से शुरू हो रही है, ऐसे में दबाव बढऩा तय है। उनका कहना है कि ई-वे बिल के बाद इनवायस मैचिंग और रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म की व्यवस्था भी शुरू होने वाली है। ऐसे में कारोबार पर दबाव बढ़ेगा। ई-वे बिल प्रणाली को पहले एक फरवरी से लागू किया जाना था, लेकिन शुरुआत के पहले घंटे में दो तीन लाख बिल के लोड से ही सिस्टम ध्वस्त हो गया था। 
 
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