इन्फ्रास्ट्रक्चर व रियल एस्टेट:अवसरों की कोई कमी नहीं

  • Posted on: 10 November 2018
  • By: admin
देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल एस्टेट का क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। सुविधायुक्त शहर बनाने की बड़ी योजनाओं से कुशल लोगों के लिए बड़ी संख्या में रोजगार भी बने हैं। ऊंची-ऊंची आवासीय इमारतों व अत्याधुनिक दफ्तरों को देखकर किसी भी देश की तरक्की का सहज ही बोध होता है। यह सारा ताना-बाना इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल एस्टेट से जुड़ा होता है। जिस तेजी से भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है,
उसी तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल एस्टेट सेक्टर भी कुलांचें भर रहा है। करियर के लिहाज से भी यह सेक्टर युवाओं की पहली पसंद बनता जा रहा है। बीएचयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिषेक मुद्गल कहते हैं कि यह क्षेत्र देश के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक है।  
पद और पैसा दोनों हैं इस क्षेत्र में-आधारभूत निर्माण से संबंधित विकास में कुशल व्यक्ति की हर कदम पर जरूरत पड़ती है। सिविल इंजीनियर, टाउन प्लानर आदि की जहां आधारभूत ढांचों के निर्माण की योजनाओं में जरूरत होती है, वहीं अकाउंटेंट व फाइनेंशियल एनालिस्ट जैसे विशेषज्ञ ऐसी योजनाओं में बजट संबंधी कार्य देखते हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए इस क्षेत्र में भविष्य एवं पैसा दोनों हैं।        
प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (देश भर में कई जगह शाखाएं मौजूद)
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर
स्कूल ऑफ मैनेजमेंट फॉर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट स्ट्रैटेजी, बैंगलुरू 
यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज, देहरादून
एमिटी स्कूल ऑफ अर्बन मैनेजमेंट, नोएडा    
ज्यादातर रोजगार इन रूपों में हैं मौजूद
सरकारी योजनाओं का पूरा जोर शहरी विकास एवं संसाधन बढ़ाने पर है।  इसके चलते सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार के भरपूर मौके बन रहे हैं...
प्रॉपर्टी मैनेजर
ये मैनेजर किसी पेशेवर प्रॉपर्टी मैनेजमेंट कंपनी का हिस्सा होते हैं और किसी की इन्वेस्टमेंट प्रॉपर्टी की देखभाल करते हैं। प्रॉपर्टी को किराए, लीज पर लेना और ग्राहकों से संबंधित काम करना इनका कार्यक्षेत्र है।
फैसिलिटीज मैनेजर
फैसिलिटीज मैनेजर बड़े-बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट से जुड़े होते हैं। इनका काम बड़ी-बड़ी आवास योजनाओं, मॉल्स, दफ्तर आदि की बिक्री में ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलाना होता है। 
रिएल एस्टेट ब्रोकर
इसमें रेजिडेंशियल व कमर्शियल दो तरह के रियल एस्टेट ब्रोकर होते हैं। रेजिडेंशियल ब्रोकर हाउस प्रॉपर्टी को खरीदने और बेचने का काम करता है, जबकि कमर्शियल ब्रोकर होटल, ऑफिस, कमर्शियल र्बिंल्डग को खरीदने-बेचने का काम करता है।
रियल एस्टेट एनालिस्ट
इन पेशेवरों का काम लोगों को निवेश के लिए बेहतर लोकेशन, जमीन या अन्य प्रॉपर्टी के बारे में सूचनाएं और जानकारियां देना होता है।  
सिविल इंजीनियर
चाहे बिल्डिंग बनानी हो या सड़क या डैम, हर जगह सिविल इंजीनियरों की जरूरत पड़ती है। स्ट्रक्चरल इंजीनियर जहां मैटीरियल, डिजाइन व निर्माण की मजबूती पर काम करते हैं, वहीं आर्किटेक्ट उसकी सुंदरता व भव्यता पर फोकस रहते हैं। इन पेशेवरों को सरकारी व निजी क्षेत्र की कंपनियों में रोजगार मिलता है।
आर्किटेक्ट
सरकारी आर्किटेक्ट के रूप में सेंट्रल एवं स्टेट पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट हाउसिंग एवं अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, सिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी, स्टेट हाउसिंग बोर्ड आदि में काम किया जा सकता है, जबकि बतौर प्राइवेट आर्किटेक्ट आप टीचिंग, रीयल एस्टेट, डेवलपमेंट फर्म, प्राइवेट आर्किटेक्चर फर्म में काम कर सकते हैं।
टाउन प्लानर
टाउन प्लानर खाली स्थान के हिसाब से वह सारी सुविधाएं अपनी योजना में शामिल करते हैं, जिनकी दैनिक जीवन में लोगों को आवश्यकता होती है। इसके अंतर्गत छात्र प्लानिंग डिजाइनर, प्लानिंग ड्राफ्टमैन, टाउन प्लानर असिस्टेंट के रूप में नौकरी पाते हैं। ड्राइंग का ज्ञान काफी काम आता है।
सेल्स एग्जिक्यूटिव
हरेक छोटी-बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में सेल्स एंड मार्केटिंग से जुड़े पेशेवरों की जरूरत होती है। सेल्स एंड मार्केटिंग, बिजनेस मैनेजमेंट का हिस्सा होता है। 
फाइनेंशियल एनालिस्ट
समय-समय पर इन्फ्रास्ट्रक्चर व रियल सेक्टर में रिलेशनशिप मैनेजर, फाइनेंशियल प्लानिंग मैनेजर आदि के रूपों में अवसर सामने आते हैं। ये डाटा एनालिसिस, मार्केट रिसर्च, क्लाइंट डेवलपमेंट एनालिसिस आदि क्षेत्रों में भी नौकरी पा सकते हैं।
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