आयुर्वेद एवं संस्कृत के सात विद्वानों को लक्ष्मीनारायण स्मृति सम्मान

  • Posted on: 15 November 2011
  • By: gaurav

जयपुर। राष्ट्रपति सम्मानित संस्कृत मनीषियों एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आयुर्विज्ञानियों की उपस्थिति में शनिवार को राजस्थान चैम्बर भवन के भैरोंसिंह शेखावत सभागार में आयुर्वेद एवं संस्कृत के सात विद्वानों को वैद्य लक्ष्मीनारायण स्मृति विद्वत् सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने आयुर्वेद एवं संस्कृत के क्षेत्र में स्व. लक्ष्मीनारायण शर्मा के योगदान को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व और कृतित्व समाज की ऐसी उपलब्धि है जिससे समाज सैकड़ों वर्ष प्रेरणा लेता रहेगा।समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामानुज देवनाथन ने कहा कि संस्कृत के विकास से ही महान भारतीय सभ्यता और संस्कृति की रक्षा संभव है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए जयपुर की महापौर ज्योति खण्डेलवाल ने कहा कि मुझे स्व. लक्ष्मीनारायण जी का व्यक्तिश: मार्गदर्शन मिला है और यदि आज के राजनेता व अधिकारी उनके जीवन मूल्यों और आदर्शों पर चलें तो भ्रष्टाचार जैसी समस्या स्वत: ही समाप्त हो सकती है। प्रोफेसर वैद्य लक्ष्मीनारायण शर्मा स्मृति जन कल्याण न्यास की ओर से स्व. लक्ष्मीनारायण शर्मा की 82वीं जयन्ती पर आयोजित इस समारोह में राष्ट्रपति सम्मानित संस्कृत विद्वान् देवर्षि कलानाथ शास्त्री, पंडित मोहनलाल पाण्डे, डॉ. हरिराम आचार्य एवं पं. नारायण कांकर शास्त्री भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने विद्वानों को ये सम्मान प्रदान किए। महापौर ज्योति खण्डेलवाल ने शॉल ओढ़ाकर सभी विद्वानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर सदैव सभा के अध्यक्ष वैद्य मदनलाल, प्रख्यात आयुर्वेद चिकित्सक फूलचन्द शर्मा, न्यास अध्यक्षा रमा देवी शर्मा, प्रख्यात चिकित्सा विज्ञानी डॉ. बृजमोहन शर्मा, प्रभाकर शास्त्री एवं भट्ट राजा राजेन्द्र कुमार सहित आयुर्वेद और संस्कृत के अनेक ख्यातिनाम विद्वान उपस्थित थे। समारोह में जिन विद्वानों को सम्मानित किया गया, उनमें केन्द्रीय आयुर्वेद चिकित्सा परिषद् भारत सरकार के अध्यक्ष वैद्य रघुनंदन शर्मा, राजस्थान सरकार के संस्कृत शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. मंडन शर्मा, राजस्थान महाराजा कॉलेज वेद विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश प्रसाद दास, राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में साहित्य के प्रोफेसर ताराशंकर शर्मा, पूर्व जिला आयुर्वेद अधिकारी वैद्या चित्रलेखा अजमेरा एवं वैद्य कैलाश जोशी शामिल थे।प्रारंभ में कार्यक्रम संयोजक एवं न्यास के महामंत्री डॉ. अनन्त शर्मा ने न्यास की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पं. प्यारे मोहन शर्मा एवं डॉ. कृष्णा गौड ने स्व. शर्मा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। डॉ. वेदवती शर्मा ने अतिथियों का आभार ज्ञापित किया। इससे पूर्व संयुक्त महामंत्री नवीन शर्मा, उपाध्यक्ष वैद्य दयाकांत शर्मा, मंत्री डॉ. रामकृष्ण अंगीरस, कोषाध्यक्ष अरविन्द शर्मा एवं संयुक्त मंत्री सुरेन्द्र शर्मा ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।नवीन शर्मा, संयुक्त महामंत्री

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