आमदनी बढ़ाएगा निर्यात

  • Posted on: 10 December 2018
  • By: admin

सरकार के मुखिया नरेन्द्र मोदी ने स्वयं देश से यह वायदा किया हुआ है कि वह 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करेंगे। इस दृष्टि से लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि मंत्रालय का नाम पर बदलकर कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय रखा गया ताकि इसका कार्यक्षेत्र विस्तृत हो सके। चूंकि कृषि मूलत: राज्यों का विषय है, इसलिए केंद्र की कदम उठाने की सीमाएं भी हैं। जाहिर है,
इसमें केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बनाना एकमात्र उपाय होता है। किंतु कुछ कदम हैं, जिनका निर्णय केंद्र ही कर सकता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा कृषि क्षेत्र का निर्यात 2022 तक दोगुना कर 60 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य ऐसा ही है। राज्य चाहें भी तो निर्यात की दिशा में अपनी ओर से कदम उठाना कठिन है। इस समय कृषि निर्यात 37 अरब डॉलर है। वस्तुत: अगर किसानों की आय बढ़ानी है तो बहुआयामी कदम उठाने होंगे। इसमें निर्यात की बढ़ोतरी भी एक प्रमुख कदम हो सकता है। हमारे देश में कई बार आंतरिक संकट और परेशानियों को देखते हुए कई बार अनेक कृषि उत्पादों के निर्यात पर रोक लगानी पड़ती है। लेकिन कुछ ऐसे पैदावार हो सकते हैं, जिनका पैदावार निर्यात के उद्देश्य से ही किया जाए। खबरों के मुताबिक चाय, काफी, चावल और अन्य जिंसों के निर्यात को बढ़ावा देना है। जाहिर है, इनकी गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को प्रोत्साहन देना होगा। भारत में चावल की कुछ ऐसी किस्में हैं, जिनकी विश्व बाजार में मांग हैं। उनको ध्यान में रखकर किसानों को खेती करने को लिए हर तरह का प्रोत्साहन देना होगा। इसके लिए कई पहलुओं पर भी काम करना होगा। इसमें ढांचागत सुविधाओं का आधुनिकीकरण, उत्पादों का मानकीकरण, नियमन को बेहतर बनाना, बिना सोचे फैसलों पर अंकुश और शोध एवं विकास गतिविधियों पर ध्यान देना जरूरी है। वैसे इन पहलुओं के विकास से भारत में कृषि को ऐसा ढांचा उपलब्ध हो सकेगा, जिससे किसान स्वयं लाभान्वित होंगे। हमारे यहां जैविक उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह भी निर्यात के रास्ते की बाधा थी। इसे हटाने की घोषणा कर दी है। किंतु ध्यान रखना होगा कि अत्यधिक आय की चाहत में ज्यादातर जैविक पैदावार विदेश ही न चले जाएं। इसलिए जैविक पैदावार का विस्तार करने के मिशन को काफी आगे ले जाने की आवश्यकता है।

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