आधार पर निराधार हैं आपत्तियां

  • Posted on: 25 January 2018
  • By: admin
देश की विकास यात्रा में आधार क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। यह बिचौलियों व भ्रष्टाचार को खत्म कर गरीबों तक उनका हक पहुंचा रहा है। डिजिटल समावेशन व डिजिटल सशक्तीकरण डिजिटल इंडिया के दो प्रमुख लक्ष्य हैं, जिन्हें हासिल करने में आधार अहम भूमिका निभा रहा है। यह सुरक्षित होने के साथ-साथ डिजिटल इंडिया के परिवर्तनकारी व समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने का एक किफायती और सशक्त माध्यम भी है। 130 करोड़ की आबादी वाले देश में आज 119 करोड़ लोग आधार के तहत पंजीकृत हो चुके हैं
और लगभग 99 प्रतिशत जनसंख्या के पास आधार उपलब्ध है। कल तक भ्रष्टाचार और शासकीय संवेदनहीनता से जूझ रहे मनरेगा मजदूर के चेहरे पर आज इसलिए मुस्कान है, क्योंकि आधार के कारण उसकी कड़ी मेहनत का मेहनताना सीधे उसके बैंक खाते में पहुंच रहा है। 
आधार के कारण ही लगभग 80 हजार फर्जी शिक्षकों को निकालना संभव हुआ। आधार जनता के पैसे बचा रहा है। फर्जी गैस कनेक्शन, फर्जी राशन कार्ड या फर्जी शिक्षकों को हटाकर लगभग 57 हजार करोड़ रुपए की जो बचत हुई है, उसका लाभ गरीबों के लिए चल रही योजनाओं को ही होगा। संप्रग सरकार और राजग सरकार के आधार में बड़ा फर्क है। संप्रग सरकार के समय आधार को कोई कानूनी, विधायी सुरक्षा या मान्यता हासिल नहीं थी। नरेंद्र मोदी सरकार ने आधार को तकनीकी रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाने के अलावा एक सबल कानूनी सुरक्षा भी प्रदान की है। आधार कानून न केवल आधार के उपयुक्त रखरखाव को सुनिश्चित करता है, बल्कि उसकी पूरी प्रणाली को एक उत्तरदायी प्रशासन भी बनाता है। इसमें भी सबसे अहम है व्यक्ति की निजता की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधानों की व्यवस्था। यह कानून आधार बायोमेट्रिक डाटा के दुरुपयोग के लिए कड़े दंड और आपराधिक अभियोग का प्रावधान भी करता है। कोर बायोमेट्रिक जैसे कि उंगलियों के निशान और आंखों के स्कैन पूरी तरह से एन्क्रिप्ट रूप में रखे जाते हैं, जिसे तोड़ पाना लगभग असंभव है। आपको जानकर हैरानी होगी कि आधार सत्यापन की प्रक्रिया में आधार सर्वर को भी यह ज्ञात नहीं होता कि सत्यापन किस मकसद के लिए किया जा रहा है। आधार द्वारा रोज करीब छह करोड़ से अधिक सत्यापन किए जाते हैं।
 
Category: