अन्ना की वापसी

  • Posted on: 26 December 2011
  • By: gaurav

इंतजार की घडिय़ां खत्म हुईं! आ गई, आ गई, आ गई! राजधानी में छा गई! रिटर्न ऑफ अण्णा उर्फ अण्णा की वापसी। अब यह मत पूछिएगा कि अण्णा की वापसी ही क्यों? अण्णा द्वितीय क्यों नहीं? द्वितीय इसलिए नहीं कि नाम में द्वितीय रखने से फिल्म चलने से ज्यादा डूबने का खतरा रहता है। द्वितीय को भी चलने के लिए नए नाम का सहारा चाहिए। रही बात अण्णा का बदला की, तो बात-बात पर और बिना बात भी भड़कने वाला कैरेक्टर हो, ऑफिशियली अण्णा के साथ टाइटिल में बदलाव नहीं रह सकता है। आखिरकार अन्ना गांधीवादी हैं। नाम के या टोपी के ही गांधीवादी नहीं, काम के भी गांधीवादी। बहुतों के महात्मा द्वितीय और रालेगण वालों के तो बाकायद भगवान। गांधी के साथ बदला तो किसी तरह नहीं चल सकता है। पता नहीं कैसे जनाब नारायण राणे अण्णा के खिलाफ कांग्रेस की सुपारी लेने का आरोप लगा रहे हैं। महाराष्ट्र के हैं, इतने साल मुंबई में रहते हुए हो गए, कम से कम उन्हें तो पता होना चाहिए था कि किसी की तरफ से और किसी के खिलाफ होने से ही कोई काम सुपारी लेना नहीं हो जाता है। गाली देने या थप्पड़ मारने के लिए सुपारी नहीं लिया-दिया करते हैं। फिर किसी पार्टी के खिलाफ राजनीतिक प्रचार की सुपारी का आइडिया ही एकदम फालतू है। लुढ़काने से कम की सुपारी को सुपारी नहीं कहते। हां, अगर राणे साहब को यह लगता हो कि अण्णा का धक्का उनकी कांग्रेस को लुढ़का भी सकता है, तो बात दूसरी है। सो न द्वितीय और न बदला, फकत अण्णा की वापसी राजधानी में लग रही है। और वापसी है तो पूरी वापसी है। सो एक-एक करके दोनों जगह लग रही है, जंतर-मंतर पर भी और रामलीला मैदान में भी। उसी क्रम में रविवार, 11 दिसंबर को जंतर-मंतर पर ट्रेलर। और 27 दिसंबर से रामलीला मैदान में पूरी फिल्म।लेकिन इससे कोई यह न समझे कि हम यह कह रहे हैं कि रामलीला मैदान में फिल्म पूरी हो जाएगी। फिल्म की एंडिंग पहले से बता दें तो फिर मजा ही क्या रह जाएगा। जाहिर है कि द्वितीय की एंडिंग प्रथम से तो डिफरेंट होगी ही होगी। लेकिन क्या होगी यह नहीं बता सकते। हां, एक क्लू जरूर दे सकते हैं। अनशन तो इस बार भी होगा पर इस बार अनशन अनिश्चित नहीं, निश्चित काल का होगा। जी हां, आठ दिन का अनशन और उसके बाद... ?  -नवीन शर्मा

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