यूनाइटेड स्टील का टीसीएस से समझौता

  • Posted on: 12 June 2012
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दुबई। यूनाइटेड स्टील कंपनी (एसयूएलबी) ने अपनी स्टील मिल को एसएपी (सिस्टम एप्लीकेशंस एंड प्रोडक्ट्स) सॉफ्टवेयर और बिजनेस वेयरहाउसिंग सॉल्यूशंस उपलब्ध कराने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी टीसीएस से समझौता किया है। एसयूएलबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद अज जब्र ने कहा कि एसएपी सोल्यूशंस के क्रियान्वयन के लिए विश्व की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी से यह समझौता अहम है। एसयूएलबी बहरीन स्थित फोलाथ और जापान की यामातो कोगए की संयुक्त उद्यम कंपनी है। संयुक्त उद्यम में फोलाथ की 51 फीसदी और यामातो कोगयो की 49 फीसदी हिस्सेदारी है।

संवेदनशील उत्पादों का आयात बढ़ा

  • Posted on: 12 June 2012
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नई दिल्ली। फल-सब्जी, शराब और कुछ अन्य उत्पादों का आयात बढऩे से अप्रैल 2011 से फरवरी 2012 के बीच संवेदनशील वर्ग के उत्पादों का कुल आयात 40.9 फीसदी बढ़कर 92,574 करोड़ रुपये हो गया। इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आयात 65,695 करोड़ रुपये का रहा था। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक बीते वित्त वर्ष के पहले 11 महीने में फल व सब्जियों का आयात 75.3 प्रतिशत बढकर 8,374 करोड़ रुपये हो गया। यह अप्रैल-फरवरी 2010-11 में 4,776 करोड़ रुपये रहा था। संवेदनशील श्रेणी में खाद्यान्न, ऑटोमोबाइल्स, दूध व ब्रेवरेजेज जैसे उत्पाद आते हैं और इन उत्पादों का आयात सरकार की निगरानी में होता है। सरकार यह सुनिश्चित कर

जल्द बढ़ेंगे दूध के दाम

  • Posted on: 12 June 2012
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नई दिल्ली। अगले कुछ दिनों में दूध के दाम बढऩा तय है। केंद्र सरकार भारी किल्लत के मौसम में दूध का निर्यात खोलने जा रही है। गुरुवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस पर फैसला हो जाएगा। दूध की कमी के चलते पिछले साल इसकी कीमतें पांच बार बढ़ाई गई थी। राष्ट्रीय दुग्ध विकास परिषद (एनडीडीबी) ने पिछले साल दूध की बढ़ी कीमतों को थामने के लिए 50 हजार टन दूध पाउडर का आयात किया था। दुग्ध उत्पाद केसिन के निर्यात की अनुमति केंद्र पहले ही दे चुका है। जबकि दूध पाउडर के निर्यात का फैसला ऐसे भीषण गरमी के मौसम में किया जा रहा है जब दूध का उत्पादन अपने निचले स्तर पर पहुंच चुका है। कृषि मंत्रालय के तैयार कैबिने

डीएलएफ पर 22,725 करोड़ कर्ज

  • Posted on: 12 June 2012
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नई दिल्ली। कर्ज में कमी की तमाम कोशिशों के बावजूद देश की सबसे बड़ी रीयल्टी कंपनी डीएलएफ बीती तिमाही में अपने कर्ज में केवल 33 करोड़ रुपये की कमी कर पाई है। तिमाही के अंत तक इस पर कुल 22,725 करोड़ रुपये का कर्ज था। इससे पिछली तिमाही अक्टूबर-दिसंबर (2011) में यह कर्ज 22,758 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी ने उम्मीद जताई है कि अगले छह महीने में अपनी गैर प्रमुख (नान कोर) संपत्तियों की बिक्री करके वह कर्ज में 4,000 करोड़ रुपये की कमी कर लेगी। इसके अलावा कंपनी की कारोबार में नकदी प्रवाह बढ़ाकर और पूंजीगत खर्च में कमी करके कर्ज में कमी की योजना बना रही है। कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में भूखंड और आइटी पार

हीरो मोटोकॉर्प करेगी तगड़ा निवेश

  • Posted on: 12 June 2012
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नई दिल्ली। वाहनों की बिक्री पिछले कई महीनों से घटने के बावजूद भारतीय ऑटो कंपनियां भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं। यही वजह है कि सोमवार को देश की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प ने 2,575 करोड़ रुपये के नए निवेश का एलान किया है। बीते साल होंडा से अपने दशकों पुराने रिश्ते को तोड़कर बाहर निकली हीरो गुजरात और राजस्थान में दो नए उत्पादन संयंत्र लगाएगी। हीरो मोटोकॉर्प के एमडी व सीईओ पवन मुंजाल ने बताया कि गुजरात में 1,100 करोड़ रुपये की लागत से एक नया संयंत्र लगाया जाएगा। नीमराणा (राजस्थान) स्थित प्लांट में एक यूनिट और स्थापित की जाएगी। इस पर 400 करोड़ रुपये की लागत आएगी। जयपुर मे

जल प्रदूषण की रोकथाम

  • Posted on: 12 June 2012
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किसी भी प्रदेश में प्रदूषण की स्थिति का आकलन इस बात से आसानी से किया जा सकता है कि वहां की आबो-हवा कैसी है। पंजाब के 22 जिलों में से 20 जिलों में भूजल अत्यंत प्रदूषित है। सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि स्थिति कितनी भयावह है। ऐसा नहीं है कि सरकार इस स्थिति से पार पाने के लिए कुछ नहीं कर रही है, किंतु इतना तय है कि जो भी कदम सरकार द्वारा उठाए जा रहे हैं वे इतनी भयावह स्थिति से निपटने के लिए अपर्याप्त हैं। पंजाब में जल प्रदूषण के विरुद्ध अभियान चलाने वालों में संत सीचेवाल का नाम प्रमुख है और वह अक्सर यह शिकायत करते नजर आते हैं कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ठीक ढंग से काम नहीं कर रहा है। प्रदेश

सरकार की कथनी और करनी में फर्क कर्मचारी कर रहे हैं रेलवे का बेड़ा गर्क

  • Posted on: 12 June 2012
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रेलवे का बड़ा स्टेशन हो या छोटा हालात जैसे के तैसे ही है, यानि बदतर थे और आज भी बदतर ही है, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की हालत जंग के मैदान जैसी है, टिकिट घर पर नान आरक्षित टिकिट की लाइसेंस लम्बी लम्बी और टिकट खिड़की कम है। टिकिट प्रक्रिया भी धीरे होती है। भले ही किसी यात्री की गाड़ी क्यों न निकल जायें, यानि अगर टिकिट के मूल्य के बराबर पैसे नहीं देते हैं तो खुले पैसे का बहना बनाकर कई-कई रुपयों का फटका यात्री को लगाया जाता है। मजबूरी में नुकसान यात्री का ही है। उच्च अधिकारी पता नहीं जांच क्यों नहीं करते या फिर मिलीभगत हो सकती है। होता यह है कि ट्रेन की क्षमता से ज्यादा टिकिट आरक्षित हो सैकें

वे रोमन में लिखते हैं, हिंदी जिनका पेशा है

  • Posted on: 12 June 2012
  • By: admin

पूरा विज्ञापन बाजार हिंदी क्षेत्र को ही दृष्टि में रखकर विज्ञापन अभियानों को प्रारंभ करता है किंतु उसकी पूरी कार्यवाही देवनागरी के बजाए रोमन में होती है। जबकि अंत में फायनल प्रोडक्ट देवनागरी में ही तैयार होना है। गुलामी के ये भूत हमारे मीडिया को लंबे समय से सता रहे हैं। इसके चलते एक चिंता चौतरफा व्याप्त है। यह खतरा एक संकेत है कि क्या कहीं देवनागरी के बजाए रोमन में ही तो हिंदी न लिखने लगी जाए। कई बड़े अखबार भाषा की इस भ्रष्टता को अपना आर्दश बना रहे हैं। जिसके चलते हिंदी शरमायी और सकुचाई हुई सी दिखती है। शीर्षकों में कई बार पूरा का पूरा शब्द अंग्रेजी और रोमन में ही लिख दिया जा रहा है। जैसे-

इंसान 3000 साल पहले भी यूज करते थे फेसबुक

  • Posted on: 12 June 2012
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लंदन। अभी तक हम यही मानते हैं कि फैसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स का चलन बिल्कुल नया है और पिछले 10 से 15 साल में ही इसने जोर पकड़ा है। इंटरनेट के विस्तार के बाद ही सोशल साइट्स की लोकप्रियता लोगों के बीच बढ़ी है लेकिन यदि वैज्ञानिकों की मानें तो कांस्य युग में यानी करीब 3000 साल पहले भी लोग एक दूसरे से जुड़े रहने के लिये फेसबुक सरीखे किसी सोशल नेटवर्क से जुडे रहते थे। वैज्ञानिकों ने इसे फेसबुक का प्राव ऐतिहासिक संस्करण करार दिया है। कैब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक टीम ने रूस और स्वीडन में दो विशालकाय ग्रेनाइट चट्टानों पर उकेरे गये हजारों चित्रों के अध्ययन के बाद यह दावा किया है।

पटरी पर कैसे आए अर्थव्यवस्था

  • Posted on: 12 June 2012
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केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन द्वारा वर्ष 2011-12 के लिए सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की विकास दर को संशोधित कर 6.5 प्रतिशत रखा गया। वर्ष 2010-11 में यह दर 8.4 प्रतिशत थी। आर्थिक विकास दर में इस कमी को बहुत आश्चर्य की नजर से नहीं देखा जा रहा, क्योंकि वर्ष 2011-12 की दूसरी और तीसरी तिमाही में कोई बहुत अच्छे नतीजे नहीं आए थे। इस वर्ष अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र में विकास दर घटी है। कृषि में वर्ष 2010-11 में 7 प्रतिशत की विकास दर की तुलना में 2011-12 में 2.8 प्रतिशत रही है। खनन क्षेत्र में तो विकास दर एक प्रतिशत नकारात्मक हो गई जो पिछले वर्ष पांच प्रतिशत थी। उद्योग क्षेत्र में भी कुछ ऐसा ही हा

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